खेती की लागत कम करने के उपाय

खेती को लाभदायक बनाने के लिए दो ही उपाय हैं- उत्पादन को बढ़ाएँ व लागत खर्च को कम करें। कृषि में लगने वाले मुख्य आदान हैं बीज, पौध पोषण के लिए उर्वरक व पौध संरक्षण, रसायन और सिंचाई। खेत की तैयारी, फसल काल में निंदाई-गुड़ाई, सिंचाई व फसल की कटाई-गहाई-उड़ावनी आदि कृषि कार्यों में लगने वाली ऊर्जा की इकाइयों का भी कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण स्थान है। 

इनका उपयोग किया जाना आवश्यक है, परंतु सही समय पर सही तरीके से किए जाने पर इन पर लगने वाली प्रति इकाई ऊर्जा की क्षमता को बढ़ाया जा सकता है। इनका अपव्यय रोककर व पूर्ण या आंशिक रूप से इनके विकल्प ढूँढकर भी लागत को कम करना संभव है। 

देश की मिट्टी में कम हुए पोषक तत्व:बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी

पूरे देश भर की मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी आ रही है। इससे खेतीबाड़ी में करीब 20 फीसदी तक उत्पादन घट गया है। सोलन के बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के विशेषज्ञों की मिट्टी की जांच में यह खुलासा हुआ है। कृषि के लिए मिट्टी में पाए जाने नाइट्रोजन, पोटाश, सल्फर, जिंक और बोरान में कमी आ गई है। माना जा रहा है कि इससे धरती की उर्वरा शक्ति तो प्रभावित हो ही रही है, फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो मिट्टी की अच्छी सेहत के लिए 16 पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इसमें कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन वातावरण और पानी से मिलते हैं।

किसान फटाफट कर लें रबी फसलों की बुआई-सिंचाई

किसान फटाफट कर लें रबी फसलों की बुआई-सिंचाई

खरीफ की फसलों को मौसम ने बेहद नुकसान पहुंचाया. फसल कटान के समय बारिश पड़ने पर किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी. अब सीजन रबी फसलों की बुवाई का चल रहा है. आजकल मौसम नरम चल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, 4 से 5 दिन मौसम सापफ रहेगा. उत्तर भारत के कई राज्यों में दिन में तापमान 26 डिग्री सेल्सियस, रात में 15 से 18 डिग्री सेल्सियस रह रहा है. मौसमी आद्रता भी सुबह में करीब 80 प्रतिशत और दोपहर में लगभग 50 प्रतिशत बनी हुई है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का कहना है कि फसलों की बुवाई और सिंचाई के लिए मुफीद मौसम है. 

किसान ऐसे करें गेहूं की फसल की सिंचाई

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