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खरीफ

इन फसलों को बोते समय अधिक तापमान एवं आर्द्रता तथा पकते समय शुष्क वतावरण की आवश्यकता होती हैं। उत्तर भारत में इनको जुन-जुलाई में बोते हैं और इन्हें अक्टूबर के आसपास काटा जाता है।

नामोत्पत्ति

अरबी भाषा में 'ख़रीफ़' (خريف) शब्द का मतलब 'पतझड़' है। ख़रीफ़ की फ़सल अक्टूबर में पतझड़ के मौसम में तैयार होती है इसलिए इसे इस नाम से बुलाया जाता है।

उदाहरण

धान (चावल)
मक्का
ज्वार
बाजरा
मूँग
मूँगफली
गन्ना

किसान फटाफट कर लें रबी फसलों की बुआई-सिंचाई

किसान फटाफट कर लें रबी फसलों की बुआई-सिंचाई

खरीफ की फसलों को मौसम ने बेहद नुकसान पहुंचाया. फसल कटान के समय बारिश पड़ने पर किसानों की फसल बर्बाद हो गई थी. अब सीजन रबी फसलों की बुवाई का चल रहा है. आजकल मौसम नरम चल रहा है. मौसम विभाग के अनुसार, 4 से 5 दिन मौसम सापफ रहेगा. उत्तर भारत के कई राज्यों में दिन में तापमान 26 डिग्री सेल्सियस, रात में 15 से 18 डिग्री सेल्सियस रह रहा है. मौसमी आद्रता भी सुबह में करीब 80 प्रतिशत और दोपहर में लगभग 50 प्रतिशत बनी हुई है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट का कहना है कि फसलों की बुवाई और सिंचाई के लिए मुफीद मौसम है. 

किसान ऐसे करें गेहूं की फसल की सिंचाई

खरीफ फसलों का 38 लाख टन कम हो सकता है उत्‍पादन

खरीफ फसलों का 38 लाख टन कम हो सकता है उत्‍पादन

चालू खरीफ सीजन में कुल खाद्यान्न उत्पादन 13.46 करोड़ टन रहने का अनुमान है. इस तरह पिछले साल के मुकाबले उत्पादन में 2.77 फीसदी यानी करीब 38 लाख टन की गिरावट रहेगी. कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 के लिए प्रमुख खाद्यान्न उत्पादों का अग्रिम अनुमान जारी किया. इसके तहत खरीफ चावल का कुल उत्पादन 9.44 करोड़ टन तक अनुमानित है. खरीफ दलहनों का कुल उत्पादन 87.1 लाख टन और गन्ने का उत्पादन 33.76 करोड़ टन तक अनुमानित है. औसत से 5 फीसदी कम हुई वर्षा मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2017-18 के लिए खरीफ एवं रबी फसलों को मिलाकर कुल उत्पादन 27.56 करोड़ टन रहने का अनुमान है.

छत्तीसगढ़ की 40 तहसीलों में सूखे के हालात

छत्तीसगढ़ की 40 तहसीलों में सूखे के हालात

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में सूखे की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को पहली रिपोर्ट भेज दी है। रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि छत्तीसगढ़ के छह जिलों सहित 40 तहसीलों में सूखे के हालात बन रहे हैं। इन तहसीलों में औसत से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसल चौपट होने के कगार पर है। धान की बियासी का कार्य भी प्रभावित हो रहा है। समय पर राहत कार्य नहीं खोले गए तो राज्य से खेतिहर मजदूरों का अन्य राज्यों में पलायन हो सकता है।

अच्छे मानसून के बावजूद देश के एक तिहाई हिस्सों में कम बारिश

अच्छे मानसून के बावजूद देश के एक तिहाई हिस्सों में कम बारिश

लगातार दो सूखों के बाद देश में इस साल जाकर सामन्य वर्षा हुई है। हालांकि, सामान्य वर्षा के बाद भी देश का एक तिहाई भाग कम या अल्प वर्षा का सामना कर रहा है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून से सितम्बर चलने वाले चार महीने के दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान अगस्त 2016 तक तीन महीनों में देश के 200 से ज्यादा ज़िलों में कम या बहुत कम बारिश हुई।

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