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उद्यमिता और रोजगार से ही जैविक खेती सम्भव : डॉ आर.के.सिंह

जैविक में उद्यमिता और रोजगार : डॉ आर.के.सिंह

किसान जागरूक होने से किसान द्वारा जैविक खेती का जोर लगातार kisanhelp द्वारा दिया जाता रहा है। डॉ आर.के.सिंहने एक कार्यक्रम कहा कि जैविक खेती वर्तमान समय की जरुरत है साथ ही बहुत सारे पड़े लिखे किसान बंधू इसे उद्योग बना कर एक अच्छा मंच प्राप्त कर सकते हैं।

स्ट्राबेरी की उन्नत खेती

 

भारत में स्ट्राबेरी की खेती सर्वप्रथम उत्तर प्रदेश तथा हिमाचल प्रदेश के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में 1960 के दशक से शुरू हुई, परन्तु उपयुक्त किस्मों की अनुउपब्धता तथा तकनीकी ज्ञान की कमी के कारण इसकी खेती में अब तक कोई विशेष सफलता नहीं मिल सकी। आज अधिक उपज देने वाली विभिन्न किस्में, तकनीकी ज्ञान, परिवहन शीत भण्डार और प्रसंस्कण व परिरक्षण की जानकारी होने से स्ट्राबेरी की खेती लाभप्रद व्यवसाय बनती जा रही है। बहुद्देशीय कम्पनियों के आ जाने से स्ट्राबेरी के विशेष संसाधित पदार्थ जैसे जैम, पेय, कैंडी इत्यादि बनाए जाने के लिये प्रोत्साहन मिल रहा है।

जलवायु

जैविक खेती अपनाएं किसान

जैविक खेती अपनाएं किसान

बिहार-झारखण्ड के सभी 24 विभागों के 58 चयनित किसान कार्यकर्ताओं की बैठक शहर के सदातपुर स्थित सरस्वती विद्या मंदिर सह भारती शिक्षण संस्थान के प्रांगण में संपन्न हुई। बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का जैविक खेती सह ग्राम विकास हेतु प्रेरक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। सरसंघचालक ने बताया कि जिन लोगों ने रासायनिक खेती करके अपनी भूमि को मात्र 400 वर्षों में बंजर बना दिया, वे भी अब जैविक खेती का विचार करने लगे हैं।

जरबेरा फूल की लाभदायक खेती

भूमिका-

जरबेरा एक विदेशी और सजावटी फूल का पौधा है जो पूरी दुनिया में उगाया जाता है और जिसे ‘अफ्रीकन डेजी’ या ‘ट्रांसवाल डेजी’ के नाम से जाना जाता है।  इस फूल की उत्पत्ति अफ्रीका और एशिया महादेश से हुई है और यह ‘कंपोजिटाए’ परिवार से संबंध रखता है। भारतीय महाद्वीप में, जरबेरा कश्मीर से लेकर नेपाल तक 1200 मीटर से लेकर 3000 मीटर की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसकी ताजगी और ज्यादा समय तक टिकने की खासियत की वजह से इस फूल का इस्तेमाल पार्टियों, समारोहों और बुके में किया जाता है। भारत के घरेलु बाजार में इसकी कीमत काफी अच्छी है।

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