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जिमीकंद

किसान कर रहे हैदराबादी और जोगिंदर जिमीकंद की खेती

जिमीकंद की खेती

कृषि महाविद्यालय में प्रयोग के बाद पहली बार बिलासपुर जिले के ग्राम गोदइयां के किसान बड़े पैमाने पर हैदराबादी और गजेंदर जिमीकंद की खेती कर रहे हैं। इस जिमीकंद की खेती छत्तीसगढ़ के सिर्फ बस्तर में होती है। बाजार में अन्य जिमीकंद से इसका भाव अधिक होता है।

पूरे देश में हैदराबादी और गजेंदर जिमीकंद दो ऐसे वेराइटी हैं, जिसमें अम्ल की मात्रा अधिक और क्षार नहीं के बराबर होती है। इसलिए इसमें खुजलाहट जरा भी नहीं होती। लोग सब्जियों के अलावा सामान्य खाने में भी इसका उपयोग कर सकते हैं। औषधि के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है।

जिमीकंद की बुवाई मई तक पूरी कर लें

जिमीकंद की बुवाई  मई तक पूरी कर लें

जिमीकन्द अपने औषधीय एवं भोज्य गुणों के कारण जाना जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसकी खेती छोटे स्तर पर घरों के आसपास पेड़ों की छाया में की जाती है। इसके औषधीय गुणों की वजह से मांग बढऩे की वजह से इसकी खेती व्यावसायिक रूप लेने लगी है। इसकी खेती को अपनाने के इच्छुक किसान मार्च से मई तक इसकी बोआई पूरी कर लें।