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किसानों को मुफ्त मिलेंगे जायद फसलों के बीज

किसानों को मुफ्त मिलेंगे जायद फसलों के बीज

शासन की टीम ने मंगलवार को बारिश और ओलावृष्टि से तबाह किसानों को कुछ राहत देने की कोशिश की है। प्रमुख सचिव कृषि अमित मोहन प्रकाश ने कहा है कि जायद की फसलों की बुआई के बीज किसानों को नि:शुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। जायद में मूंग, उड़द, मक्का, ज्वार, बाजरा की बुआई होती है।

नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर वीके सिंह को दी गई है। इसकी पुष्टि डीएम डॉ. रोशन जैकब ने की है। दूसरी तरफ शासन की टीम ने सदर, बिल्हौर और घाटमपुर तहसील क्षेत्र के गांवों में जाकर फसलों के अधिकतम नुकसान का आकलन किया है। 

किसान का गौरवशाली अतीत था, आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए

आज किसान को मार्गदर्शन चाहिए

आज किसान बहुत दुविधा में पड़ा है। वह चाहता है कि वह रासायनिक खाद से कैसे छुटकारा पाए ताकि उसकी धरती फिर से उपजाऊ हो। वह भुल सा गया है कि उनके पुरखे गोबर और गोमूत्र से खाद बनाकर इतने सम्पन्न थे कि उन्होंने आजादी की लड़ाइयों अर्थात 1857, 1905 और 1930 स्वतंत्रता आंदोलनों में सबसे अधिक भाग ही नहीं लिया बल्कि उसमें दिल खोलकर धन भी खर्च किया। उस समय के किसान सम्पन्न थे और देश-भक्त तो थे ही। अंग्रेजी शासकों ने ये सब जानते हुए किसान को खत्म करने की एक साजिश रची। उन्होंने एक कानून पास किया जिसका नाम रखा ‘लैण्ड एक्यूसाईज़ेशन एक्ट’ जिससे हर रोज अत्याचारों के माध्यम से किसानों की खड़ी-

प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार

प्राकृतिक आपदा से हुए कृषि विनाश में कृषिक संरक्षण हेतु कुछ विचार

चल रही महती प्राकृतिक आपदा से कृषिक त्राहि त्राहि कर रहा है, क्यूँकि आने वाला वर्ष उसके लिए निःसन्देह बहुत ही कठिन सिद्ध होने वाला है । ऐसी भीषण समस्या का समाधान क्या हो, इस पर गम्भीर विचार विमर्श करने की आवश्यकता है । इस लेख के माध्यम से लेखक उक्त विषय पर अपने विचार प्रस्तुत कर रहा है । लेखक के विचार में यह कठिन परिस्थिति एक स्वर्णिम अवसर है, जिसमें न केवल हम भारतीय जन अपने कृषिकों के संरक्षण हेतु कुछ कर सकते हैं, अपितु सम्पूर्ण समाज के नैतिक उत्थान की दिशा में भी कुछ प्रगति कर सकते हैं ।

उपाय

किसानों के कर्ज़ को पुनर्गठित करें बैंक : केंद्र

यूपी के फतेहपुर ज़िले में हरतरफ बारिश और ओले से बर्बाद फसल बिखरी पड़ी है, लेकिन मुआवज़े के नाम पर किसानों को अभी तक कुछ नहीं मिला है।
राम सिंह की 6 बीघे की खेती थी, लेकिन बारिश ने चना, गेहूं और तिलहन की फसल तबाह कर दी। मुआवज़े की उम्मीद नहीं दिखी और सदमा बर्दाश्त से बाहर हो गया। सबसे मुश्किल उन किसानों के साथ है, जिनकी आधी फसल बर्बाद हो गई, लेकिन मुआवजे के लिए जरूरी जायजा लेने अभी तक कोई नहीं आया और अब लाचार होकर उन्हें बची-खुची फसल काटनी पड़ रही है।

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