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मूंग की खेती कर बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरा शक्ति

मूंग की खेती कर बढ़ाएं मिट्टी की उर्वरा शक्ति

 तेजी से घट रही मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने के लिए कृषि विभाग कई तरह के कार्यक्रमों का संचालन व्यापक स्तर पर कर रहा है. लगातार रासायनिक उर्वरकों  के प्रयोग से बहुत तेजी से मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट रही है, जिसको लेकर विभाग के साथ-साथ सरकार काफी चिंतित है.

 

अब विभाग का ध्यान जैविक खाद का प्रयोग करने की तरफ बढ़ रहा है, जिससे एक तरफ मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी बढ़ सके, वहीं दूसरी ओर किसानों  को आर्थिक लाभ भी मिल सके.  इस योजना के तहत कृषि विभाग खाली पड़े खेतों में मूंग, सनई व ढैचे की खेती को करने पर बल दे रहा है.

 

क्या होगा लाभ: जैविक खाद में मिट्टी की उर्वरा शक्ति को बढ़ाने की भरपूर क्षमता है. एक बार खेत में जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति तीन वर्षो तक बनी रहती है.

 

कैसे करती है काम: मूंग, सनई व ढैचा क ी जड़ों में एक गांठ पायी जाती है, जिसमें एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया पाये जाते है. इनमें नाइट्रोजन को अवशोषित करने की विशेष क्षमता पायी जाती है. चूंकि नाइट्रोजन का फसल के उत्पादन में विशेष स्थान है, वहीं इससे मिट्टी की जल धारण की क्षमता भी बढ़ जाती है. मूंग की खेती के बाद किसानों को दो बार उसकी फली को तोड़ने का अवसर भी मिलता है, जिससे एक तरफ जहां खाने के लिए उन्हें दाल प्राप्त हो जाती है, वहीं दूसरी ओर उनकी  मिट्टी को जैविक खाद भी प्राप्त हो जाती है.

मूंग की फली को तोड़ने के बाद किसान उसको आसानी से हल के माध्यम से मिट्टी में दबा देंगे, जो धीरे-धीरे सड़ कर जैविक खाद बन जाती है. जैविक खाद बनने की स्थिति में मिट्टी के भीतर फास्फोरस व पोटासियम तत्व भी प्रचुर मात्र में प्राप्त हो जाते हैं.

सात अप्रैल तक कर लें मूंग की खेती: किसान भाइयों को चाहिए कि वे सात अप्रैल तक मूंग की खेती कर लें.

 

यह किसान के लिए काफी लाभदायक होगी. प्रखंड स्तर पर किसानों के बीच अनुदानित दर पर मूंग के बीज के वितरण का कार्य चल रहा है, जो 30 मार्च तक जारी रहेगा. यह बीज 80 प्रतिशत अनुदान पर दिया जा रहा है. किसान भाई प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पास आवेदन कर हाथों हाथ बीज प्राप्त कर सकते हैं. जिले में एसएमएल 668 नस्ल का बीज वितरण के लिए सरकार द्वारा उपलब्ध कराया गया है.