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Aksh's blog

अक्ल पर ताला हो तो विज्ञान कहां जाए?

अक्ल पर ताला हो तो विज्ञान कहां जाए?

यदि आप देखना चाहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण मुद्‌दों पर तथ्यों के बिना कैसे बहस होती है तो मेरे साथ राव तुला राम मार्ग के पश्चिमी छोर पर स्थित दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैम्प की छोटी-सी यात्रा पर चलें। यह सुंदर, हरा-भरा, शांत और गंभीर परिसर है। अन्य संस्थानों के अलावा यहां के बायो टेक्नोलॉजी सेंटर में देश की सबसे महत्वपूर्ण शोध प्रयोगशालाएं हैं।

असफल तकनीक एवं कृषि समस्याएं

असफल तकनीक एवं कृषि समस्याएं

भारत की अधिकतर जनसंख्या गावों में रहती है, जहाँ अनेक प्रकार के खाद्यान्नों का उत्पादन किया जाता है | भोजन मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है | अत: खाद्यान्नों का सीधा सम्बन्ध जनसंख्या से है | भारत की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है | इस प्रकार बढ़ती हुई जनसंख्या को भोजन खिलाने के लिए कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया और पश्चिमी देशों की तर्ज पर 1966-67 में हरित क्रांती का अभियान चलाया गया और “ अधिक अन्न उपजाओ ” का नारा दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप अधिक उपज प्राप्त करने के लिए रासायनिक खाद, रासायनिक कीटनाशकों एवं रासायनिक खरपतवारनाशकों के कारखाने लगाये गए | रासायनिक खाद, रासायनिक कीटनाशकों एवं रास

खेती के लिए गाय और केंचुए में से कौन अधिक महत्त्वपूर्ण ?

खेती के लिए गाय और केंचुए में से कौन अधिक महत्त्वपूर्ण ?

 जैविक व प्राकृतिक खेती पर वैश्विक स्तर पर बहस होती रही है। देश में रसायन खेती को रोकने के लिए जो पहल हुई थी वो शुरू से ही दो हिस्से में बंट गयी एक तबका गाय का पक्ष में हैं और दूसरा केंचुआ पर आधारित खेती के पक्ष में 

कपड़े का मशहूर ब्रांड गैप समाज और कारोबार में बढ़त पाने की खातिर गोबर पर आधारित प्राकृतिक खेती का समर्थन कर रहा है। यही वजह है कि भारत में गायों की संख्या कम होने से गैप चिंतित है।

विज्ञान से अछूते क्यों रहें हमारे गांव?

विज्ञान से अछूते क्यों रहें हमारे गांव?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों गांवों की बदलती तस्वीर में वैज्ञानिकों की भूमिका पर टिप्पणी कर देश में संस्थानों के दायित्वों की तरफ अहम इशारा किया है। यह बात पूरी तरह सच है कि ये संस्थान इस देश को इंडिया बनाने में ज्यादा चिंतित रहे, न कि भारत। आज भी हमारे देश का बड़ा हिस्सा गांवों में ही बसता है। साढ़े छह लाख गांवों में देश की 70 प्रतिशत आबादी रहती है। इस बड़ी आबादी के वे सभी अधिकार उतने ही महत्वपूर्ण और जरूरी हैं, जितने शहरी आबादी के। बड़ी बात तो यह है कि देश में जो भी आर्थिक गतिविधियां हैं, उनका मूल स्रोत गांव ही तो हैं। वर्तमान आर्थिक तंत्र का 90 प्रतिशत हिस्सा गांवों के संसाधनों प

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