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मसाले

भोजन को सुवास बनाने, रंगने या संरक्षित करने के उद्देश्य से उसमें मिलाए जाने वाले सूखे बीज, फल, जड़, छाल, या सब्जियों को 'मसाला (spice) कहते हैं। कभी-कभी मसाले का प्रयोग दूसरे फ्लेवर को छुपाने के लिए भी किया जाता है।

मसाले, जड़ी-बूटियों से अलग हैं। पत्तेदार हरे पौधों के विभिन्न भागों को जड़ी-बूटी (हर्ब) कहते हैं। इनका भी उपयोग फ्लेवर देने या अलंकृत करने (garnish) के लिए किया जाता है।

बहुत से मसालों में सूक्ष्मजीवाणुओं को नष्ट करने की क्षमता पाई जाती है।

अदरक की उन्नत आर्गनिक जैविक खेती

 : जलवायु —

 

अदरक उष्ण कटिबंधीय मसाला फसल है : सामान्यत अदरक के लिए गर्मी और नमीयुक्त मौसम उपयुक्त रहता है फिर भी 1500 मीटर कि उंचाई के केरल के घाटी प्रदेशों में भी अदरक कि खेती कि जाती है वर्षा पोषित खेती के 1500 -3000 मिमी 0 वार्षिक वर्षा पोषित आवश्यक लिए है बीजों के रोपण से लेकर अंकुरण तक हल्की वर्षा और बढ़वार कि स्थिति में – बीच बीच में भारी वर्षा अच्छी होती है बुवाई के कम से कम एक महीने पहले बरसात समाप्त होनी चाहिए अदरक कि खेती के लिए केरल का मौसम सर्वोत्तम माना गया है .

: भूमि —

सामान्य मेथी की उन्नत उत्पादन तकनीक

सामान्य मेथी का वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला फोइनमग्रेसियम एवं एक और वर्ग कस्तूरी मेथी का है जिसका वानस्पतिक नाम ट्राइगोनेला कार्निकुलाटा है। मेथी की खेती मुख्यत: सब्जियों, दानो (मसालों) एवं कुछ स्थानो पर चारो के लिये किया जाता है। मेथी के सूखे दानो का उपयोग मसाले के रूप मे, सब्जियो के छौकने व बघारने, अचारो मे एवं दवाइयो के निर्माण मे किया जाता है। इसकी भाजी अत्यंत गुणकारी है जिसकी तुलना काड लीवर आयल से की जाती है। इसके बीज में डायोस्जेनिंग नामक स्टेरायड के कारण फार्मास्यूटिकल उधोग में इसकी मांग रहती है। इसका उपयोग विभिन्न आयुर्वेदिक दवाओं को बनाने में किया जाता है। इस लेख मे सामान्य मेथी की उ

लहसुन के सत से दूर करें तिलहन फसलों के रोग

इस रसायन का नाम डायलाइल थायोसल्फिनेट है, जो हर प्रकार के फफूंद से होने वाले रोगों को रोकने में सक्षम है। इसका छिड़काव करने से तिलहन की फसल पर लगने वाला फफूंद पूरी तरह से खत्म हो जाता है। सरसों उत्पादक जिलों में किए गये अध्ययन में ये बात साफ हो गई है कि रासायनिक कीटनाशकों के मुकाबले लहसुन के घोल का छिड़काव करने से जहां फसल पर लगा रोग पूरी तरह से समाप्त हो जाता है, वहीं पैदावार में भी कमी नहीं आती है।

प्याज की उन्नत खेती

कन्द वर्गीय सब्जीयों में व्यापारिक दृषिटकोण से प्याज का बहुत अधिक महत्व है। भारतीय आहार में प्याज का बहुत अधिक उपयोग होता है। वर्तमान फास्ट-फूड के जमाने में इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। सब्जीयाें के गाढ़ेपन व स्वाद बढ़ाने के अतिरि ä प्याज से कुछ औषघीय तत्व भी शरीर को मिलते हैं, जिसके कारण हृदय रोग, खेन में थôा बनना व कोलेस्ट्राल आदि विकारों पर नियंत्रण रखने मेंं मदद होती है। इसी प्रकार मसाले, केचप, साँस आदि पदार्थाों में भी प्याज का उपयोग किया जाता है। निर्जलिकृत प्याज की चकितयाँ व पावडर की माँग विदेशें में अधिक है। सफेद प्याज को निर्जलिकृत पर चकितयाँ व पावडर बनाने के कारखाने महाराष्ट्र व

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