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हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

हरित क्रांति की आग में झुलसते पंजाबी पुत्तर

क्या आपको पता है कि हमारे देश में एक ट्रेन ऐसी भी चलती है, जिसका नाम ‘कैंसर एक्सप्रेस’ है? सुनने में यह बात हतप्रभ करने वाली है, पर यह सच है, भले ही इस ट्रेन का नाम कुछ और हो, पर लोग उसे इसी नाम से जानते हैं। यह ट्रेन कैंसर बेल्ट से होकर गुजरती है। यह ट्रेन भटिंडा से बीकानेर तक चलती है। इसमें हर रोज कैंसर के करीब 70 यात्री सफर करते हैं। जानते हैं यह यात्री कहाँ के होते हैं? पंजाब का नाम तो सुना ही होगा आपने? इस नाम के साथ वहाँ के गबरु जवानों के चित्र आँखों के सामने आने लगते हैं। पर इसी पंजाब के गबरु जवानों को हमारे रासायनिक खादों की नजर लग गई। जिस पंजाब की धरती ने लहलहाते खेतों को अपने सीने से लगाया है, आज वही धरती शर्मसार है, क्योंकि यही धरती आज अपने रणबाँकुरों को कृशकाय रूप में देख रही है। जी हाँ, जंतुनाशकों और रासायनिक खादों का अत्यधिक उपयोग यहाँ के किसानों को कैंसरग्रस्त कर रहा है। लोग यहाँ से अपना इलाज करवाने बीकानेर स्थित ‘आचार्य तुलसी कैंसर ट्रीटमेंट एंड रिसर्च सेंटर’ आते हैं।

पूर्व में किये गये अध्ययनों के अनुसार मालवा इलाके में खेती के लिये कीटनाशकों, उर्वरकों तथा एग्रोकेमिकल्स के अंधाधुंध उपयोग के कारण मानव जीवन पर कैंसर के खतरे की पुष्टि हुई थी, और अब इन्हीं संकेतों के मद्देनज़र किये गये अध्ययन से पता चला है कि पंजाब के मालवा इलाके के पानी, मिट्टी और अन्न-सब्जियों में यूरेनियम तथा रेडॉन के तत्व पाये गये हैं। कुछ अध्ययनों के अनुसार आर्सेनिक, फ़्लोराइड और नाईट्रेट की उपस्थिति भी दर्ज की गई है, जिसकी वजह से हालत बद से बदतर होती जा रही है। इस इलाके के भटिण्डा जिले और इसके आसपास का इलाका ‘कॉटन बेल्ट’ के रूप में जाना जाता है, तथा राज्य के उर्वरक और कीटनाशकों की कुल खपत का 80 प्रतिशत इसी क्षेत्र में जाता है। पिछले कुछ वषों से इस इलाके में कैंसर से होने वाली मौतों तथा अत्यधिक कृषि ण के कारण किसानों की आत्महत्या के मामले सामने आते रहे हैं। इस इलाके के लगभग 93 किसान औसतन प्रत्येक 2.85 लाख रुपए के कर्ज तले दबे हुए हैं। पहले किये गये अध्ययनों से अनुमान लगाया गया था कि क्षेत्र में बढ़ते कैंसर की वजह बेतहाशा उपयोग किये जा रहे एग्रोकेमिकल्स हैं, जो पानी के साथ भूजल में पैठते जाते हैं और भूजल को प्रदूषित कर देते हैं। हाल ही में कुछ अन्य शोधों से पता चला है कि भूजल के नमूनों में प्रदूषित केमिकल्स के अलावा यूरेनियम, रेडियम और रेडॉन भी पाये जा रहे हैं, जिसके कारण मामला और भी गम्भीर हो चला है।

रासायनिक खादों एवं जंतुनाशकों से पंजाब की उपजाऊ धरती आज बंजर होने लगी है। यही हाल वहाँ के किसानों का है, जो लगातार कैंसरग्रस्त होने लगे हैं। उनके शरीर पर कैंसर के बजबजाते कीड़े अपना असर दिखाने लगे हैं। कभी अपनी दिलेरी को लेकर विख्यात यहाँ के किसान शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग बन रहे हैं। इतना कुछ होने पर भी न तो पंजाब सरकार और न ही केंद्र सरकार ने इस दिशा में ध्यान दिया। रोज सैकड़ों मरीज पंजाब से बीकानेर आते हैं, इनमें से कितने स्वस्थ हो पाते हैं और कितने काल कलवित होते हैं, यह जानने की फुरसत किसी को नहीं है। पंजाब बहुत ही समृद्ध राज्य है। ऐसा माना जा सकता है, पर दबे पाँव वहाँ गरीबी अपने पैर पसार रही है। यह भी सच है। राज्य के बीस में से 11 जिले और 60 प्रतिशत आबादी मालवा अंचल के किसान कैंसर जैसी बीमारी का शिकार हो रहे हैं। अधिकांश की हालत जोगिंदर की तरह ही है। निजी अस्पतालों में लाखों रुपए खर्च करने के बाद कई लोग सरकारी अस्पताल में आकर अपना इलाज करवाने के लिए विवश हैं।

चंडीगढ़ की ‘पोस्ट ग्रेज्युएट इंस्टीटच्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च’ (पीजीआईएमईआर) द्वारा किए गए एक शोध में पता चला कि उक्त कैंसर एक्सप्रेस से रोज औसतन 70 मरीज बीकानेर जाते हैं। जहाँ से ये मरीज आते हैं, उसे क्षेत्र को कैंसर बेल्ट कहते हैं। पूरे राज्य से इसी क्षेत्र से कैंसर के मरीज बीकानेर जाते हैं। यहाँ हर साल एक लाख लोगों में से 51 लोग कैंसर के कारण मौत के मुँह में चले जाते हैं। यहाँ से आने वाले मरीजों को डॉक्टर यही सलाह देते हैं कि वे कुएँ या बोरवेल का पानी पीने के बजाए पेक किया हुआ पानी पीएँ। 1970 में आई हरित क्रांति ने किसानों को समृद्ध बना दिया। कालांतर में यही हरित क्रांति उनके लिए अभिशाप बन गई। यहाँ हरित क्रांति के दौरान उपयोग में लाई गई रासायनिक खाद और जंतुनाशक के कारण भूगर्भ जल दूषित हो गया। यह जल इतना प्रदूषित हो गया कि इसका सेवन करने वाला रोगग्रस्त हो गया।

सन् 2007 में राज्य की पर्यावरण रिपोर्ट के अनुसार पूरे पंजाब में उपयोग में लाए जाने वाले पेस्टीसाइड्स का 75 प्रतिशत तो केवल मालवा में ही खप गया। इसके दुष्परिणाम बहुत ही जल्द सामने आ गए। वास्तव में रासायनिक खाद एवं जंतुनाशकों का अधिक बेइंतहा इस्तेमाल ही आज कैंसर के रूप में सामने आया है। यहाँ एक हेक्टेयर जमीन पर 177 किलो रासायनिक खाद उपयोग में लाया जाता रहा, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसका उपयोग प्रति हेक्टेयर 90 किलो है। इनमें शामिल नाइट्रेट का सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ा है। अधिक खाद और जंतुनाशकों से केवल किसान ही सबसे अधिक प्रभावित हुए हों, ऐसा नहीं है। भटिंडा की आदेश मेडिकल कॉलेज के डॉ. जी.पी.आई. सिंह बताते हैं कि 3,500 की आबादी वाला गाँव जज्जर की महिलाओं को अधूरे महीने में ही प्रसूति हो जाती है। नवजात शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग होते हैं। ये नवजात इतने कमजोर पैदा होते हैं कि अपना सर तक नहीं सँभाल पाते हैं। इस गाँव में ऐसे 20 बच्चे हैं। अभी तक इसका सुबूत नहीं मिला है कि इन क्षेत्रों में पैदा होने वाली ऐसी संतानों की बीमारी के पीछे यही जंतुनाशक और रासायनिक खाद ही जिम्मेदार है। पर इतना तो तय है कि जंतुनाशक और कैंसर के बीच कुछ तो संबंध है।

भटिंडा की अस्पताल से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सन् 2004-2008 के बीच खेतों में जंतुनाशकों का छिड़काव करते समय साँस के साथ शरीर में गई दवाओं से 61 लोगों की मौत हो चुकी है। यहाँ के किसानों के खून में हेप्टाक्लोर और इथिऑन जैसे रसायन पाए गए, जो कैंसर का कारण बनते हैं। यह रसायन पशुओं के चारे, सब्जियों के साथ-साथ गाय और माताओं के दूध में भी पाए जाते हैं। सबसे दु:खद बात यह है कि पंजाब में रासायनिक खाद और जंतुनाशकों से इतना कुछ होने के बाद भी किसान जैविक खाद का इस्तेमाल नहीं करना चाहते। जंतुनाशकों के साथ पर गोबर खाद का भी इस्तेमाल करने में कोताही करते हैं। इस संबंध में उनका कहना है कि गोबर खाद महँगी पड़ती है, लेकिन क्या उनके स्वास्थ्य से भी महँगी है? कैंसर के इलाज में जब लाखों रुपए खर्च हो जाते हैं, कई मौतें हो जाती हैं, फिर जो हालात सामने आते हैं, वे तो इतने महँगे नहीं होते? पूरे मालवा क्षेत्र से हरियाणी गायब हो रही है, पशु-पक्षी अपना बसेरा छोड़ने लगे हैं, महिलाओं के बाल अकारण ही सफेद होने लगे हैं, यही नहीं, यहाँ के युवाओं को कोई अपनी बेटी देने को तैयार नहीं है। इसके बाद भी यदि किसान या सरकार इस दिशा में नहीं सोचते, तो फिर कौन देखेगा पंजाबी पुत्तरों को? हृष्ट-पुष्ट जवानों की पूरी कौम ही बरबाद हो रही है, आज तक रासायनिक खादों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगा। अभी कितनी मौतें और होनी हैं, बता सकता है कोई?