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वर्मी कम्पोस्ट खेती के लिए वरदान

वर्मी कम्पोस्ट खेत की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाता है। यह एक प्राकृतिक खाद है। जिसके इस्तमाल से किसी भी तरह की हानि फसल और मनुष्य को नहीं होती। जब किसान अपनी फसल काट लेता है तो उस खेत की उपजाऊ शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे समय पर किसानों को वर्मी कम्पोस्ट यानी प्राकृतिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। पूर्व जिला कृषि अधिकारी साम्बा अशोक गुप्ता ने इस बारे में किसानों को जानकारी दी।

 

वर्मी कम्पोस्ट खाद में तत्वों की मात्रा सबसे अधिक होती है। इसके इस्तेमाल से खेत में नमी बरकरार रहती है। यह रसायनिक खादों से सस्ती और फसल को बीमारियों से बचाती है। फल, फूल, सब्जियों औरदानों की जिन्दगी बढाती है। इसके इस्तेमाल से 40 से 80 प्रतिशत फसल की पैदावार भी बढ़ जाती है।

 

किसान वर्मी कम्पोस्ट का खेतों में कभी भी इस्तमाल कर सकते हैं। यह खाद मिट्टी में मिलने के बाद ज्यादा फायदेमंद होता है। खाद को दो चरणों में खेतों में डालना चाहिए। पहल चरण जमीन की तैयारी करते समय और दुसरे चरण को दो हिस्सो में बाँट ले जैसे एक हिस्सा ट्रांसप्लांटिंग के वक्त डालें या जब 2 पत्ते की स्टेज हो। और दूसरा हिस्सा जब फूलों की स्टेज आ जाए, उस वक्त डालें। गुलाब, जैसमीन, मोगरा, सूरजमुखी, गुट्टा आदिफूलों की खेती के लिए 2 क्विंटल प्रति कनाल वर्मी कम्पोस्ट डालें।

 

वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के लिए एक मीटर चौड़ाई में एक मीटर से कम गहरा और लम्बाई में अपने हिसाब से छायादार जगह पर गड्ढा बनाएं। गड्ढा जमीन से थोड़ा ऊंचाई पर बनाएं ताकि उसमें वर्षा का पानी इकठ्ठा न हो। केंचुओं को 20-25 दिन पुराने गोबर से ढक दें।गोबर को एक जगह न डालें उसे बराबर कर दें। गोबर के ऊपर 5 से 10 सैंटीमीटर मोटी तह सूखे पत्तों की डाल दें। बीस दिनों तक लगातार पानी का छिड़काव करें। 26 वें दिन5-10 सैंटीमीटर  गोबर की ऊपरी तह में हफ्ते के अंदर 2 बार डालें ताकि गड्ढा भर जाए। पानी का छिड़काव रोज करना है। जब वर्मी कम्पोस्ट तैयार हो जाए तो 2-3 दिन के लिए पानी का छिड़काव करना बंद कर दें। गड्ढे से कम्पोस्ट निकाल कर सूखने तक उसका ढेर लगाये। जो कम्पोस्ट तैयार है, उसमें 20-25 प्रतिशत नमी होनी चाहिए। इसे हमेशा छांव में सुखाएं। फिर इसे छानकर पैक कर ले।

साभार krishibhoomi