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Aksh's blog

किसानों को आज तक क्या मिला ?

kisanhelp.in

किसानों की बात... ये मेरी लिए कोई नई बात नहीं है। हम किसानों के दर्द और तकलीफ को बहुत सालों से उठा रहे हैं और साथ में ये भी सच्चाई है कि उनके लिए घोषणाएं और स्कीमों की कोई कमी नहीं होती है। बजट में भी बड़े प्रस्ताव रखे गए किसानों के लिए, सरकार ने अपनी तरफ से ये लक्ष्य तय किया कि किसानों की आमदनी अगले पांच सालों में दोगुनी हो जाएगी। मेरे सवाल बेहद सीधे और बुनियादी हैं।

उर्वरता की हिंसक भूमि

उर्वरता की हिंसक भूमि

खेतों में उर्वरता बढ़ाने के लिए, नाइट्रोजन के उर्वरक पाने के लिए यूरोप दुनिया के कोने-कोने खंगाल रहा था। ऐसा एक स्रोत था ‘गुआनो’। यह आता था दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी छोर से दूर, प्रशांत महासागर के द्वीपों से। गुआनो असल में चिड़िया की बीट है। इन निर्जन द्वीपों पर न जाने कब से समुद्री चिड़ियाओं का वास था, जो समुद्र से मछली और दूसरे प्राणियों का शिकार करती हैं। अनगिनत इन चिड़ियों की बीट इन द्वीपों पर जम जाती थी और वहां इनके पहाड़ खड़े हो गए थे। बारिश कम होने के कारण ये पहाड़ जैसे के तैसे बने रहे और इनके उर्वरक गुण धुले नहीं थे। कुछ जगह तो बीट के ये पहाड़ 150 फुट से भी ऊंचे थे।

अब कौन कहेगा सूट-बूट की सरकार? - लॉर्ड मेघनाद देसाई

अब कौन कहेगा सूट-बूट की सरकार? - लॉर्ड मेघनाद देसाई

वर्तमान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा प्रस्तुत किया गया बजट बहुत ही संतुलित और सधा हुआ है। बजट में ग्रामीण भारत की चिंताओं और समस्याओं को विशेष तौर पर ध्यान में रखा गया है। ऐसा पहली बार है जब किसी वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में कृषि क्षेत्र और किसानों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया और एक तय सीमा अवधि में किसानों की आय को न सिर्फ बढ़ाने, बल्कि उसे दोगुना करने का लक्ष्य निर्धारित किया। यह एक अच्छी पहल है, क्योंकि सेवा और अन्य क्षेत्रों में देश की तमाम आर्थिक तरक्की के बावजूद किसान लगातार बदहाल हो रहे थे और खुद को उपेक्षित भी महसूस कर रहे थे।

किंतु-परंतु के साथ एक बेहतर बजट - सीता

बजट

ऐसा नहीं है कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने जो बजट पेश किया है, वह बेहतर बजट नहीं है, लेकिन यह वह धुआंधार बजट नहीं है, जिसकी कि उनसे उम्मीद की जा रही थी। इस बजट में बहुत सारे ऐसे बिंदु हैं, जिनकी जीभर के सराहना की जा सकती है, फिर भी यह एक महान बजट होने की दहलीज पर जाकर ठिठक गया आम बजट है।

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