किसान

बजट 2018 में किसान

बजट 2018 और किसान

नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली एनडीए सरकार के 2018-19 को किसानों और ग्रामीणों का बजट बताया जा रहा है। पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली फिर प्रधानमंत्री ने बार-बार जोर देखकर कहा कि ये बजट किसानों और गांव का बजट है। हम किसानों की आमदनी 2022 तक दोगुनी करेंगे और हर फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य देंगे।

आखिर किसान ही सभी वर्ग के निशाने पर क्यों हैं ?

आखिर किसान ही सभी वर्ग के निशाने पर क्यों हैं ?

सरकार ने हाल ही में उच्चतम न्यायालय में स्वीकार किया कि मुख्य रूप से नुकसान और कर्ज की वजह से पिछले चार वर्षों में लगभग 48,000 किसान अपनी ज़िन्दगी खत्म कर चुके हैं। सरकार के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आँकड़ों से पता चलता है कि यही प्रवृत्ति 1997-2012 के दौरान रही, इस दौरान करीब 2,50,000 किसानों ने अपना जीवन गँवाया, इस अवधि के बाद सरकार विवरण देना बंद कर दिया। खर्चों को पूरा करने के लिए किसानों को बैंकों से या स्थानीय ऋणदाताओं से अपनी फसलों को बोने के लिए उधार लेना पड़ता है। ज़्यादातर मामलों में स्थानीय ऋणदाता होते हैं जो कर्ज देते हैं। एनएसएसओ आँकड़ों के मुताबिक 52% से अधिक

देश कब तक कृषि और किसानों की अनदेखी करता रहेगा

देश कब तक कृषि और किसानों की अनदेखी करता रहेगा

इस बात में कोई संदेह नहीं कि देश को एक गंभीर कृषि संकट का सामना करना पड़ रहा है। हर वर्ष उर्वरक और बीजों जैसे कृषि इनपुट्स की कीमतें बढ़ती जबकि खेती से आय कम होती जा रही है। इसके साथ ही जोत का आकार लगातार सिकुड़ता जा रहा है। ग्रामीण युवकों की बेरोजगारी में बहुत अधिक उछाल आया है। कृषि अब लाभदायक धंधा नहीं रह गया। दूसरी ओर युवकों के लिए रोजगार के अवसर बहुत कम रह गए हैं। यही स्थिति हताशा और आक्रोश को हवा दे रही है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश भर में आत्महत्याएं करने वाले किसानों की संख्या गत वर्ष 12,000 का आंकड़ा पार कर गई थी। वास्तव में कुछ वर्ष पूर्व तो स्थिति इससे भी बदतर थी। गत 2 वर्षों स

हाकिम तो बदले , किसान के हालात नही

हाकिम तो बदले , किसान के हालात नही

केंद्र सरकार ने देश बदलने का बीड़ा उठाया है। कहा जा रहा है कि देश बदल रहा है। देश के लोगों का जीवन बेहतर करने का जिम्मा नीति आयोग नाम की नई संस्था को दिया गया है। मगर दिलचस्प यह है कि नीति आयोग काम तो करता है देश के लिए पंचवर्षीय योजनाएं बनाने वाले योजना आयोग की बिल्डिंग में ही। लेकिन अब वह पांच की बजाय पंद्रह साल की योजना बना रहा है। इसलिए नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ने सरकार की कमाई बढ़ाने का एक नया रास्ता खोज निकाला है। उनका सुझाव है कि किसानों पर इनकम टैक्स लगाया जाए। देबरॉय के मुताबिक, देश में किसान अच्छी-खासी आमदनी करते हैं लेकिन आय कर नहीं चुकाते हैं। हालांकि उनको पता है कि देश क

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