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मन, विचार और कर्म में सूखा

मन, विचार और कर्म में सूखा

चार सदी पहले ही लोककवि 'घाघ" कह गए थे कि 'खेत बेपनियां जोतो तब, ऊपर कुंआ खुदाओ जब", यानी किसान पहले कुंआ खोदे (यानी सिंचाई का समुचित इंतजाम कर ले), फिर उसके बाद ही खेत को जोते। तब गंगा, जमुना, गोदावरी, सिंधु, कावेरी जैसी नदियों में भी साफ शीतल जल छलकता था और दूरदराज के इलाकों में भी कुंआ खोदते ही पानी मिल जाया करता था। लेकिन आजादी के बाद जब किसान उत्पादक के बजाय महज एक वोट बैंक बन गया तो चुनाव-दर-चुनाव हर राजनीतिक पार्टी किसानों को मुफ्त बिजली-पानी देने के वादे करने लगी। जल कभी भी भुनाया जा सकने वाला चेक है, ऐसा मान लिए जाने से आदतें और बिगड़ गईं।

बढ़ता सूखे का संकट, तनावग्रस्त केंद्र सरकार

बढ़ता सूखे का संकट, तनावग्रस्त केंद्र सरकार

सूखे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की फटकार झेल चुकी सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है। सोमवार को राष्ट्रीय खरीफ सम्मेलन में कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा "दस राज्यों में भयंकर सूखा है। स्थिति बहुत खराब है। पीने का पानी लोगों को नहीं मिल पा रहा है। लेकिन जो चित्र बन रहा है उससे लगता है कि 10 राज्यों में सर्वनाश हो गया है।" जाहिर है कृषि मंत्री राधामोहन सिंह तनाव में हैं। सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार के लिए जवाब देना मुश्किल हो गया है।

पानी की कमी का कारण कम बरसात नहीं है |

पानी की कमी का कारण कम बरसात नहीं है

किसी एक राज्य में नहीं सम्पूर्ण भारत में पानी की समस्या निर्माण हो गई है, इसका मुख्य कारण सिर्फ सूखा नहीं है, पिछले कई सालों से हमारा वाटर लेवल नीचे-नीचे जा रहा है, अच्छी बरसात होने पर वाटर लेवल में कुछ सुधार आता है, परन्तु हर साल नीचे जा रहा है, जब तक इस समस्या पर विचार नहीं किया जायेगा, तब तक पानी की समस्या बनी रहेगी |

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए महिलाओं की सहभागिता जरूरी

कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए महिलाओं की सहभागिता जरूरी

कृषि में महिलाओं का योगदान काफी अहम है। कृषि क्षेत्र में कुल श्रम की 60 से 80 फीसदी तक हिस्सेदारी महिलाओं की होती है। फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गनाइजेशन (एफएओ) के एक अध्ययन से पता चला है कि हिमालय क्षेत्र में प्रति हैक्टेयर प्रति वर्ष एक पुरुष औसतन 1212 घंटे और एक महिला औसतन 3485 घंटे कार्य करती है। इस आंकड़े के माध्यम से ही कृषि में महिलाओं के अहम् योगदान को आंका जा सकता है। महिलाओं की कृषि में यह सहभागिता क्षेत्र विशेष की खेती पर निर्भर करती है फिर भी उनके योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। कृषि कार्यों के साथ ही महिलाएं मछली पालन, कृषि वानिकी और पशु पालन में भी योगदान दे रही हैं।

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