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सब्जियां

कुंदरू की जैविक खेती

भूमि का चुनाव :-

इसे भारी भूमि छोड़कर किसी भी भूमि में उगाया जा सकता है किन्तु उचित जल निकास वाली जीवांशयुक्त रेतीली या दोमट भूमि इसके लिए सर्वोत्तम मानी गई है चूँकि इसकी लताएँ पानी के रुकाव को सह नहीं पाती है अत: उचे स्थानों पर जहां जल निकास की उचित व्यवस्था हो वहीँ पर इसकी खेती करनी चाहिए |

भूमि की तैयारी :-

अरबी की खेती एक जानकारी

अरबी दो तरह की होती है जिसमे एक एडिन और दूसरी डेसिन टाइप, एडिन को अरबी तथा डेसिन को बण्डा कहते है इसकी खेती पूरे भारत में  की जाती हैI एशिया में अफ्रीका का प्रथम स्थान पैदावार एवं क्षेत्रफल में हैI  घुईया या अरबी में चिड़चिड़ाहट या एक्रीडिटी पाई जाती है और यह पकाने के बाद ख़त्म हो जाती हैI

अरबी की आर्गनिक खेती

  भूमि ---
अरबी के लिए पर्याप्त जीवांश वाली रेतीली दोमट मिटटी अच्छी रहती है इसके लिए गहरी भूमि होनी चाहिए ताकि इसके कंदों का समुचित विकास हो सके .

 जलवायु ---

अरबी कि फसल को गर्म और आर्द्र जलवायु कि आवश्यकता होती है यह ग्रीष्म और वर्षा दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है इसे उष्ण और उप उष्ण देशों में उगाया जा सकता है उत्तरी भारत कि जलवायु अरबी कि खेती के लिए सर्वोत्तम मानी गई है .

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