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जैविक कृषि सुरक्षा

अब गोमूत्र से बनेगा फसलों के लिए खास कीट नियंत्रक

रासायनिक खाद और कीटनाशकों के बढ़ते जोखिम से कृषि को बचाने के लिए अब गोमूत्र से हानिरहित कीट नियंत्रक बनाया जाएगा। साथ ही गोबर से जैविक खाद और वर्मिंग कम्पोस्ट का बड़े स्तर पर उत्पादन करने की योजना है। यह पहल लावारिस पीड़ित पशु सेवा संघ द्वारा की गई है। बहू अकबरपुर स्थित गोशाला में तैयार हो रहे तीन प्रोडक्ट का परीक्षण गोशाला की 11 एकड़ की फसलों पर किया जा रहा है।

जहरीले रसायन मतलब खेती में कैंसर

सूखे की मार से तबाह बिहार के कृषि क्षेत्र में फिर एक बड़ा हादसा हो गया है। मक्का यहां की प्रमुख फसल है। इस बार भी बड़े पैमाने पर मक्के की फसल लगाई गई थी। जिन किसानों ने पूसा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित बीज या अपने परम्परागत बीजों से खेती की थी उनके पौधों में दाने भरपूर हैं। लेकिन लगभग दो लाख एकड़ भूमि में टर्मिनेटर सीड (निर्वंश बीजों) का प्रयोग किया गया। इसके पौधे लहलहाये जरूर लेकिन उनमें दाने नहीं निकले। किसानों को कम्पनियों के एजेंटो ने बताया था कि वे उनके बीज लगायें तो पैदावार तिगुनी होगी। गरीबी की मार झेल रहे किसान उनके झांसे में आ गये। जिन किसानों ने चैलेंजर पायोनियर-7, पायोनियर-9

जैविक कीटनाशक अपनाकर पानी प्रदूषण से बचाएं

हम जिस गाँव में रहते हैं वैसे ही लगभग एक लाख गाँव पूरे उत्तर प्रदेश में है जिनमें तेरह करोड़ से भी ज्यादा लोग रहते हैं और इनमें से दस करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन पूर्णत: खेती पर ही आधारित है। इनमें से अधिकांश किसान तथा खेतिहर मजदूर हैं हमारे सारे किसान मिलकर पूरे देश की आवश्यकताओं का एक बटे पाँचवाँ भाग तो खुद ही पूरा करते हैं। 

जड़ युक्त सब्जियों की जैविक खेती

हमारे जीवन में हरी पत्तेदार व जड़ वाली सब्जियों का महत्व है। जिसमें शलजम, मूली, गाजर, अरबी, कमल आदि अति आवश्यक है, जिसका अनुमान हम इस तथ्य से स्पष्ट कर सकते हैं कि विश्व में लगभग 46 करोड़ लोग कुपोषण के शिकार हैं। भारत में कुल जनसंख्या का बहुत बड़ा हिस्सा, विशेषकर महिलाएॅं तथा बच्चे कुपोषण से ग्रस्त हैं, जिसका मुख्य कारण आहार में कम सब्जियों का उपयोग होना है। आहार विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार में प्रतिदिन मनुष्य को 285 ग्राम सब्जियाॅं लेनी चाहिए, जिसमें 100 ग्राम जड़ व कन्दीय सब्जियाॅं, 115 ग्राम पत्तेदार सब्जियाॅं एवं 75 ग्राम अन्य सब्जियाॅं होनी चाहिए। 

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